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Found 44 results

मुझे जन्म दो माँ
Price: $2.00 USD. Words: 17,630. Language: Hindi. Published: June 18, 2018. Categories: Nonfiction » Literary criticism » Women Authors
औरत को लेकर कई सवाल मेरे दिमाग में मंडराते रहते हैं। क्यों परिवार की मान-मर्यादा, शिष्टता की सीमा रेखा लड़कियों को ही दिखाई जाती है, लड़कों को नहीं? क्यों पिता, भाई, पति, बेटे की सुरक्षा के घेरे में वह जिंदगी गुजारे? क्यों सारे व्रत, उपवास, नियम-धरम औरतों के जिम्मे? क्यों पति और पुत्र के कल्याण के लिए ही सारे व्रत, पूजा, अनुषअठान? क्यों नहीं औरतों के लिए यह सब? यह करो, यह मत करो, ऐसे उठो, ऐसे बैठो-
अन्तर्द्वन्द्व
Price: $1.00 USD. Words: 4,930. Language: Hindi. Published: June 13, 2018. Categories: Fiction » Poetry » Contemporary Poetry
साहित्य समाज को आईना दिखाता है और आईना कभी झूठ नहीं बोलता है। समाज की संरचना हमने और आपने ही की है, आदरणीय विजय तन्हा जी की रचनाएं पढ़ी और विवश हो गया सोचने को। वर्तमान परिप्रेक्ष्य एवं विसंगतियों का मार्मिक शब्द चित्र है विजय तन्हा का काव्य संग्रह "अन्तर्द्वन्द्व" जिसमें "अहसास", "पेट की आग", "अपनापन", "एक सच" आदि रचनाओं में हृदय को स्पर्श कर झकझोर देने की क्षमता है। "पैगाम" शीर्षक की रचना
फिट्'टे मूंह तुंदा (डोगरी काह्'नी ते लेख संग्रैह्)
Price: $1.00 USD. Words: 7,310. Language: Hindi. Published: June 10, 2018. Categories: Fiction » Literature » Plays & Screenplays
फिट्'टे मूंह तुंदा (निक्की काह्'नीं) रतन डोगरी ते डोगरी दे कलमकारें दे भविक्ख दे बारे च डूंह्'गा सोचे करदा हा। ओह् सोचै करदा हा जे फकीरे दे कनवीनर बनदे गै कलमकारें कियां उस्सी सिरै उप्पर चुकी लैता ऐ? हर पुस्तक विमोचन उप्पर फकीरे गी गै प्रधानता दित्ती जा करदी ऐ? रत्न गी बिंद भी समझ निं ही आवै करदी जे फकीरा रातो-रात इन्ना अक्लमंद कियां होई गया ऐ, जां ए सारा कमाल डोगरी साहित्य अकादमी दिल्ली
सबरनाखा
Price: $2.00 USD. Words: 2,600. Language: Hindi. Published: May 25, 2018. Categories: Fiction » Poetry » Contemporary Poetry
शायद तुम्हारे लिए आनंद है सप्ताह भर से भूखे पेट हूँ पेट के गड्ढे में आग जल रही है धू-धू कर हुंह और बर्दास्त नहीं हो रहा है सर के ऊपर तक आग की लपटें उठ रही हैं पेट के गड्ढे को भरने जलती आग को बुझाने के लिए तुमसे कितना प्रार्थना किया एक मुट्ठी भोजन के लिए बार-बार गया तुम्हारे पास पर तुम बचे हुए भोजन को अधखाया और जूठन को मुझे देने में तुम्हें नागवार लगा गन्दी नाली में बहा दिया शायद तुम्हारे लिए आनं
छेड़ दो तार (काव्य संग्रह)
Price: $2.00 USD. Words: 4,690. Language: Hindi. Published: May 23, 2018. Categories: Fiction » Poetry » Contemporary Poetry
छेड़ दो तार छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे मन में दीपक प्रभा का दमकने लगे खिल उठें सारी कलियाँ पवन झूम ले गुन गुनायें ये पंक्षी गगन चूम ले प्यार ही प्यार हो हर दिशाओं में अब छेड़ दो तार छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे मन में दीपक प्रभा का दमकने लगे खिल उठें सारी कलियाँ पवन झूम ले गुन गुनायें ये पंक्षी गगन चूम ले प्यार ही प्यार हो हर दिशाओं में अब छेड़ दो तार छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे मन में दीप
सबसे अच्छा पिता
Price: $1.00 USD. Words: 2,340. Language: Hindi. Published: May 23, 2018. Categories: Fiction » Literature » Plays & Screenplays
दोस्तो, मै, आलोक फोगाट आपके सामने एक मार्मिक कहानी लेकर उपस्थित हुआ हूँ, माँ-बाप कैसे पेट काटकर अपने बच्चों को पढाते हैं फिर समस्या आती है उनका भविष्य बनाने की| उच्च शिक्षा का खर्चा सुनकर तो उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं,कैसे पैसों का इंतजाम होता है, उनकी जिन्दगी में एक अजनबी का भगवान बनकर आना| यही इस कहानी का आकर्षण है| दोस्तो, मै, आलोक फोगाट आपके सामने एक मार्मिक कहानी लेकर उपस्थित हुआ हूँ, माँ-
मैं अद्वितीय हूँ (कविता संग्रह)
Price: $1.00 USD. Words: 2,630. Language: Hindi. Published: May 22, 2018. Categories: Fiction » Poetry » Contemporary Poetry
मत दिखाओ यह आंखें फोड़ भी देंगे यह आंखें देश मुझे अति प्रिय मेरा झुका के देखो यह आंखें शर्म नहीं आती ओ बेशर्म क्या बेच खाई हैं यह आंखें अपना समझ छोड़ा तुम्हें निर्लज्ज तु, तेरी यह आंखें देशद्रोह हमें सहन नहीं है झुकाई हैं तेरी यह आंखें मत दिखाओ यह आंखें फोड़ भी देंगे यह आंखें देश मुझे अति प्रिय मेरा झुका के देखो यह आंखें शर्म नहीं आती ओ बेशर्म क्या बेच खाई हैं यह आंखें अपना समझ छोड़ा तुम्हें नि
निर्णय लेने की शक्ति
Price: $1.00 USD. Words: 49,910. Language: Hindi. Published: May 21, 2018. Categories: Nonfiction » Religion and Spirituality » Devotional
बह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के विचारों पर आधारित ‘‘अवैकनिंग विद द ब्रह्माकुमारीज’’ टेलीविजन कार्यक्रम के अन्तर्गत बी0के0 सिस्टर शिवानी और फिल्म अभिनेता सुरेश ओबेराय के बीच दार्शनिक वार्ता एवं बी0के0 सिस्टर शिवानी-कनुप्रिया के साथ विभिन्न विषयों पर दार्शनिक वार्ता को पुस्तक का आधार बनाया गया है। पुस्तक रचना में अमूल्य सहयोग देने वाली धर्म पत्नी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव के योगदान को नकारा नही
तेरे आने की उम्मीद (काव्य संग्रह)
Price: $1.00 USD. Words: 9,370. Language: Hindi. Published: May 21, 2018. Categories: Fiction » Poetry » Contemporary Poetry
रुक जा रुक जा दो पल के लिए ही सही पर आज तू रुक जा रो लेने दे मुझे तेरे कांधे में सर रखकर तू आज फिर मेरा हमदम बन जा ना रोक मेरे आंसूओं को . बह जाने दे इसे तू बस मेरी इन नजरो में खो जा थाम ले एक बार फिर से इन हाथों को , जो छोड़ा था तुने ज़माने के डर से थाम के इन हाथों को तू ,फिर से अपनी महोब्बत को जिंदा कर जा रुक जा रुक जा दो पल के लिए ही सही पर आज तू रुक जा रो लेने दे मुझे तेरे कांधे में सर
नाही है कोई ठिकाना (कहानी)
Price: $1.00 USD. Words: 5,230. Language: Hindi. Published: May 17, 2018. Categories: Fiction » Literature » Literary
छोटकू बाबू साहेब कब से चटोरी के बाबा केसर से पता नहीं का खुसर - फुसर कर रहे थे कि चटोरी की माई लाजवंती एकदम बेचैन हुए आंगन से ओसारी और ओसारी से आंगन कर रही थी। लगा कि उसके पेट में मरोड़ होने लगी। चापाकल से टूटहिया प्लास्टिक की बाल्टी में पानी भर कर चली गई, घर के पिछूती! वहां से आने के बाद भी वह हल्की नहीं हुई। माटी से हाथ मांज और हाथ - पैर धो फिर ओसारी में आई। देखा, अब छोटकू बाबू साहेब खटिया से उठे