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नाही है कोई ठिकाना (कहानी)
You set the price! Words: 5,230. Language: Hindi. Published: May 17, 2018. Categories: Fiction » Literature » Literary
छोटकू बाबू साहेब कब से चटोरी के बाबा केसर से पता नहीं का खुसर - फुसर कर रहे थे कि चटोरी की माई लाजवंती एकदम बेचैन हुए आंगन से ओसारी और ओसारी से आंगन कर रही थी। लगा कि उसके पेट में मरोड़ होने लगी। चापाकल से टूटहिया प्लास्टिक की बाल्टी में पानी भर कर चली गई, घर के पिछूती! वहां से आने के बाद भी वह हल्की नहीं हुई। माटी से हाथ मांज और हाथ - पैर धो फिर ओसारी में आई। देखा, अब छोटकू बाबू साहेब खटिया से उठे
घमंडी सियार व अन्य कहानियाँ (बालकथा संग्रह)
You set the price! Words: 14,980. Language: Hindi. Published: May 14, 2018. Categories: Fiction » Literature » Plays & Screenplays
खुशियां जब मिलती हैं, तो मन को लुभाती है। ये हरेक चीज से मिल सकती है। किसी से मिलने पर खुशी मिलती है। कभी सम्मान मिलने पर हम इसे प्राप्त करते हैं। कभी पुस्तक छपने पर मन प्रफुल्लित हो जाता है। कभी कोई रिश्ता बन जाता है तो मन खुशियों से भर जाता है। ये सब खुशियां प्राप्ति करने के रास्ते हैं। जो जानेअनजाने हमें प्राप्त होते हैं। बहुत अच्छा लगता है जब अच्छे-अच्छे काम होते हैं। अच्छेअच्छे लोग मिलते हैं
अपनी-अपनी व्यथा (लघुकथा संग्रह)
You set the price! Words: 14,360. Language: Hindi. Published: May 12, 2018. Categories: Fiction » Literature » Plays & Screenplays
खुशियां जब मिलती हैं तो मन को लुभाती है। ये हरेक चीज से मिल सकती है। किसी से मिलने पर खुशी मिलती है। कभी सम्मान मिलने पर हम इसे प्राप्त करते हैं। कभी पुस्तक छपने पर मन प्रफुल्लित हो जाता है। कभी कोई रिश्ता बन जाए तो मन खुशियों से भर जाता है। ये सब खुशियां प्राप्ति के रास्ते हैं। जो जाने-अनजाने हमें प्राप्त होते हैं। बहुत अच्छा लगता है जब अच्छेअच्छे काम होते हैं। अच्छे-अच्छे लोग मिलते हैं। उन से ह
गुदगुदाते पल (कहानी संग्रह)
You set the price! Words: 8,510. Language: Hindi. Published: May 11, 2018. Categories: Fiction » Literature » Plays & Screenplays
छोटी-छोटी बातें कहने का शौक है मुझे। ‘समिश्रा’ के नाम से गद्य-पद्य, दोनों विधा में लिखती हूँ। आत्म मुग्धता? नहीं आत्म प्रवंचना? नहीं फिर क्या बात है मुझमें बस एक प्यारा सा दिल मेरा और हंसी की सौगात है मुझमें दुनिया में होंगे सुखनवर बहुत अच्छे से भी अच्छे, पर बात जो मेरी वह किसी में भी नहीं छोटी-छोटी बातें कहने का शौक है मुझे। ‘समिश्रा’ के नाम से गद्य-पद्य, दोनों विधा में लिखती हूँ। आत्म मुग
भकोल (कहानी)
You set the price! Words: 20,000. Language: Hindi. Published: May 9, 2018. Categories: Fiction » Literature » Plays & Screenplays
"भकोल" की पत्नी "सौम्या" को नेताइन बनने का शौक चर्राया था। जो नेपाल से सटे नवका गांव की रहने वाली है । समाजिक रूप से पिछड़ी जाति " रेड़ा " की बेटी सौम्या की शादी एक दूसरे समाजिक रूप से पिछड़ी जाति " बहेड़ा " के युवा भकोल से, हो तो गई थी, लेकिन दोनों में कोई जोड़ नही था। "सौम्या" गोरी, पतली, लंबी और मैट्रिक पास जबकि "भकोल" काला, मोटा, नाटा और अंगूठा छाप। क़िस्मत की मारी सौम्या बेचारी के सपने सारे
Guldasta (Laghukatha Sangrah)
You set the price! Words: 14,990. Language: Hindi. Published: May 8, 2018. Categories: Fiction » Literature » Plays & Screenplays
अपनी बात खुशियां जब मिलती हैं तो मन को लुभाती है। ये हरेक चीज से मिल सकती है। किसी से मिलने पर खुशी मिलती है। कभी सम्मान मिलने पर हम इसे प्राप्त करते हैं। कभी पुस्तक छपने पर मन प्रफुल्लित हो जाता है। कभी कोई रिश्ता बन जाए तो मन खुशियों से भर जाता है। ये सब खुशियां प्राप्ति के रास्ते हैं। जो जाने-अनजाने हमें प्राप्त होते हैं। बहुत अच्छा लगता है जब अच्छेअच्छे काम होते हैं। अच्छे-अच्छे लोग मिलते है
एक ख्वाब की मौत (कहानी संग्रह)
You set the price! Words: 18,080. Language: Hindi. Published: May 5, 2018. Categories: Nonfiction » Literary criticism » Drama
झूला कुछ तीस साल बीत गये, शादी के बाद साल-दर-साल। अगर सब कुछ सफलता और विफलता के मामले में मापा जाता है, तो उनकी शादी एक विफल शादी थी। हालांकि वे एक साथ बने रहे, एक दूसरे के लिए बहुत कम महसूस करते थे, दिलो में कोई वास्तविक जुडाव नहीं था, पर वे एक साथ रहते रहे क्योंकि उनके कोई दूसरा विकल्प नहीं था। तलाक उनके लिए एक विदेशी शब्द था, एक बात जो समुद्र के पार होती है, गोरे लोगों के देशों में। उसके लि
Autophobia
Series: The Metrophobia Collection. Price: Free! Words: 5,230. Language: English. Published: April 24, 2018. Categories: Fiction » Poetry » Themes & motifs, Fiction » Poetry » Themes & motifs
Arthur Reed is a painter, a father, a husband, and a friend. However, ever since a traumatic incident in his childhood, he has suffered from Autophobia, the fear of being alone. Follow his life story in 30 poems, from an rocky childhood to a difficult adulthood, as he experiences the full range of life; from lost loves and failing marriages to runaway children and soul-destroying nursing homes.
My madness behind the abaya
Price: $9.99 USD. Words: 39,700. Language: English. Published: April 17, 2018. Categories: Nonfiction » Parenting » Family tragedy
Those lands of the east were the scene of my own hell on earth. Witch I agreed to out of love. Without certainties or guarantees. Only illusions that were melting in the fiery lava of disappointment. I had to go. Escape to be free again...
Purani chitthi Nazmon ka Guldasta
Price: $0.99 USD. Words: 10,040. Language: English. Published: April 11, 2018. Categories: Fiction » Religious
इनमें से कुछ एक नज़्में कुछ खास लोगों की सेवा में पहले भी भेज चुका हूँ, उनके पास है भी या नहीं, मुझे नहीं पता। क्या पता पिछली दिवाली की साफ़ सफ़ाई में जला दी गयी हों।