एक अभिव्यक्ति

कुछ पल, कुछ यादें और कुछ ख़याल अक्षरों से बांधें है | कभी कभी बांधते-बांधते खुद उलझा हूँ, और कभी इन मन इन अक्षरों की माला बना बैठा तो ख्यालों को ज़हन में रख कर मनके की तरह दोहराता रहा हूँ.

अगर अपने भावो को शब्दों से बाँध पाया तो आपको यह कवितायेँ और ग़ज़ल लगेंगी और न कर पाया तो आप मुझ से साक्षात्कार कर बैठेंगे More
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