पक्षीवास (उपन्यास)

बसन्त ऋतु के आने से वन उपवन और पर्वतों पर महोत्सव-सा छा गया। सभी के मन हर्ष-उल्लास से भरे थे। सभी खुशी के मारे मदमस्त से थे। जाने-अनजाने, कितने फूलों की खुशबू पूरे वातावरण को सुवासित कर देती थीं। मधुर खुशबू की महक पाकर कोयल नींद से जागती तथा पेड़ो के झुरमुटों से कूकती तथा कहती- “बसंत आ गया, बसंत.” कोयल की कूक से, मानों आम के पेड़ों को नवयौवन मिल जाता था तथा चांद की श्वेत-धवल चांदनी.... More

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