देखा है.. (कविता संग्रह )

सुधीर बंसल की काव्य कृति देखा है का आद्योपान्त पठन करने के बाद पाया कि कवि ने जीवन के सभी क्षेत्रो- सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक तथा धार्मिक में अपनी सजग दृष्टि से अवलोकन करके शब्द चित्रों को सहज कल्पना के रंगों से चित्रित करने का प्रयास किया हैं।
हम सब जानते हैं कि कविता कवि-हृदय की भावनाओं की कलात्मक संवाहिका होती हैं। More
This book has no formats available at this time.

Also by This Author

Also by This Publisher

Related Category

Essay > Literature

Reviews

This book has not yet been reviewed.
Report this book