India without Gandhi काश, गाँधीजी पैदा ही नहीँ होते...

मार्च 1922 की एक रात गांधी जी की हत्या हो जाती है, उसके बाद किस तरह से भारत माओवाद/साम्यवाद की तरफ बढ जाता है, यही इस उपन्यास की मूल कहानी है।
यह उपन्यास भारत की धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक कमजोरियोँ पर सिधा प्रहाय करती है।
इस उपन्यास मेँ आपको एक अन्तर धार्मिक प्रेम कहानी भी पढने को मिलेगी। More

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About Harishnyama

इस उपन्यास का लेखक हरीश कुमार प्रजापत है, हरीश कुमार राजस्थान के चूरु जिले के रहने वाले हैँ। यह इनकी पहली किताब है। हरीश कुमार ने MGSU, Bikaner से स्नातक तक की पढाई की है। स्नातक करने के बाद हरीश कुमार गुजरात मेँ टाइल &मार्बल फिटिँग का काम करने लगे। लगभग एक साल तक ये काम करने के बाद, काम के साथ उन्होने लिखना शुरु किया।

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