Drastikon

कैसे ताल मिलाऊँ मैं
कुछ तो मेरी मजबूरी है|
कुछ मुझको जल्दी भी है।
फूल बनाने की कोशिश में|
कैसे कली खिलाऊँ मैं।
कुछ दिल पर चोटें ज्यादा हैं|
कुछ मन पहले से भरा हुआ।
नई चोट दिल पर लाने की|
कैसे गली बनाऊँ मैं।|
कुछ तो जहन भी अलग-अलग है|
कुछ मन की भी दूरी है।
नजदीक रहा बेशक जीवन भर|
कैसे पास बुलाऊँ मैं।
कुछ तो दिल में उमंग नहीं है|
कुछ मन पहले से मरा हुआ।
नई चाल में आने वाला|
कैसे ताश बनाऊँ मैं।| More

Available ebook formats: epub

Published by OnlineGatha
Words: 21,020
Language: Hindi
ISBN: 9789385818172

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