दुविधा तू ना गई मेरे मन से

व्यंग्य रचना के क्षेत्र में एक युवा रचनाकार है। उनकी रचनाएं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विभिन्न समाचार पत्रों में छपती रही है। उनके व्यंग्य में मार भी है तो सहलाहट भी। यहीं वजह है कि वे तीखे से तीखे विषय पर अपना आक्रोश संयमित रखते है। वे शब्दों के साथ खेलते नही अपितु उनमें सार्थकता खोजते है। More

Available ebook formats: epub

Words: 47,220
Language: Hindi
ISBN: 9789385818134
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