Mai Sakshi is Dharti Ki

सम्भवतः मेरा जन्म तब हुआ था, जब इस भू मंडल की रचना की गयी थी। तब से लेकर आज तक मैं बालुका बन कर सागर की गोद में लहराती आई हूँ। समय के साथ साथ हर आती जाती लहरें मुझे भीगाती आई है। इन लहरों से मेरा एक अटूट रिश्ता कायम है। मैने इस अटल अनंत सृष्टी की हर रचना को ध्यान पूर्वक अपने अंतर्मन में कैद कर उसकी चाबी कहीं दूर शुन्य के गहरे अंधकार में फैंक दी है। तब से लेकर आज तक युग युग के हर उस पल का साक्षी बन More

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