Mai Kehta Akhan Dekhi

श्री नर्मदाप्रसाद कोरी की जड़ें जिस जमीन से जुड़ी है, पाठक इन कहानियों में उस परिवेष की गँध महसूस करेंगे। यह तथ्य स्वयं किसी कहानीकार की सफलता की उदघोषणा है। इन कहानियों को पढ़कर आप सीधे उस परिवेष में पहुँच जाते हैं, जहाँ रहते हुए लेखक ने जो देखा, जो अनुभव किया उन सब बातों को पूरी र्इमानदारी से चित्रवत उतार दिया। इसलिये ''मै कहता आँखन देखी कहानी संग्रह के लिये बहुत उपयुक्त और सार्थक बन पड़ा है। More

Available ebook formats: epub

Words: 26,020
Language: Hindi
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