Mere Alfaaz

फोजी लिखता है अपनी पत्नी को शहादत पाने से
पहले जब पता होता है उसको उसकी शहादत तय है।
मुजरिम हूँ मैं तेरा,
जो तेरा साथ ना निभा सका...
कर के तुझसे विवाह,
वो कसमे ना मै निभा सका...
फर्ज से हूँ मैं मजबूर,
जो आखिरी लम्हो मे हूँ तुझसे दूर......
दुआ करना खुदा से,
जब मौत आए तो कम ना हो मेरे चेहरे का नूर...
जब आऊ मै शहादत के बाद,
तो तुम रोना नही...
रख लेना मेरी यादों को संभाल
तुम उनको खोना नही... More

Available ebook formats: epub

Words: 1,560
Language: Hindi
Tags: mere alfaaz
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