पूस की रात - मानसरोवर लघु कथा मुंशी प्रेमचंद

पूस की रात - मुंशी प्रेमचंद

मानसरोवर कथा संग्रह – भाग १

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे ।

मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर बोली- तीन ही तो रुपये हैं, दे दोगे तो कम्मल कहाँ से आवेगा ? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी ? उससे कह दो, फसल पर दे देंगे। अभी नहीं ।

हल्कू एक क्षण अनिश्चित दशा में खड़ा रहा । More
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  • Category: Essay » Literature
  • Words: 2,270
  • Language: Hindi
  • ISBN: 9781370112548
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