ठाकुर का कुआँ - मानसरोवर लघु कथा मुंशी प्रेमचंद

ठाकुर का कुआँ
मानसरोवर कथा संग्रह – भाग १
मुंशी प्रेमचंद

जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी । गंगी से बोला- यह कैसा पानी है ? मारे बास के पिया नहीं जाता । गला सूखा जा रहा है और तू सड़ा पानी पिलाये देती है !
गंगी प्रतिदिन शाम पानी भर लिया करती थी । कुआँ दूर था, बार-बार जाना मुश्किल था । कल वह पानी लायी, तो उसमें बू बिलकुल न थी, आज पानी में बदबू कैसी ! More
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Words: 1,210
Language: Hindi
ISBN: 9781370389988
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