बातें कुछ अनकही सी

चाहा है तुमने मुझे हर रंग में, हर रूप में
साथ दिया है तुमने मेरा हर छाँव में, हर धूप में
सोचती हूँ लेकिन कभी यूँ ही बैठकर
ए मेरे हमसफ़र!
चाहा है तुमने मुझे हर रंग में, हर रूप में
साथ दिया है तुमने मेरा हर छाँव में, हर धूप में
सोचती हूँ लेकिन कभी यूँ ही बैठकर
ए मेरे हमसफ़र!
चाहा है तुमने मुझे हर रंग में, हर रूप में
साथ दिया है तुमने मेरा हर छाँव में, हर धूप में
सोचती हूँ लेकिन कभी यूँ ही बैठकर
ए मेरे More

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Words: 2,170
Language: Hindi
ISBN: 9781370029839
About वर्जिन साहित्यपीठ

सम्पादक के पद पर कार्यरत

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