लोकतंत्र और रेलगाड़ी

कविता लिखना मेरा शौक नहीं है, देश- दुनियाँ व समाज की विडम्बनायें देखकर मन प्रतिक्रियात्मक हो जाता है, जिसे तत्क्षण अभिव्यक्त करने मे कवितायें बन जाती है। इसीलिए मैं कविताओं को अभिव्यक्ति की नैनो तकनीक मानता हूँ।

इसके पूर्व मेरा काव्य संग्रह “लोकतंत्र और नदी ” इसी वर्ष (2018) प्रकाशित हुआ है, इसी क्रम में दूसरा काव्यसंग्रह “लोकतंत्र और रेलगाड़ी” प्रस्तुत है। जिसमें देश, दुनियाँ, समाज की विद्रूप More

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Words: 5,280
Language: Hindi
ISBN: 9781370080656
About वर्जिन साहित्यपीठ

सम्पादक के पद पर कार्यरत

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