रंग बिहारी

सोचतानी एगो कविता लिखी

जेहमे होखे माई के प्यार,
बाबूजी के डाट फटकार।
दिदिया के होखे पुचकार,
दादी जी के परम दुलार।

सोचतानी एगो कविता लिखी।

जेह में होखे गाँव के गोरी,
चइता कजरी झुमरी होरी।
सतुआ, भुजा, मड़ुआ, मकई,
चमन फुलेसर नथुनी मुनरी।
सोचतानी एगो कविता लिखी

जेहमे होखे माई के प्यार,
बाबूजी के डाट फटकार।
दिदिया के होखे पुचकार,
दादी जी के परम दुलार।

सोचतानी एगो कविता लिखी।

जेह में होखे गाँव More

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Words: 1,220
Language: Hindi
ISBN: 9781370903832
About वर्जिन साहित्यपीठ

सम्पादक के पद पर कार्यरत

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