अनुभूतियाँ (काव्य संग्रह)

रावण

ढोल बाजे और नाद
कर रहे उन्माद
मध्य मै हूँ खडा
जैसे धरती में हूं गढा
मैं खडा शान्त
मेरे दरम्यान सब अशांत
वर्ष दर वर्ष प्रति वर्ष
बढ रहा मेरा कद
वर्तमान युग में
बौने होते राम
मेरे समक्ष
रावण

ढोल बाजे और नाद
कर रहे उन्माद
मध्य मै हूँ खडा
जैसे धरती में हूं गढा
मैं खडा शान्त
मेरे दरम्यान सब अशांत
वर्ष दर वर्ष प्रति वर्ष
बढ रहा मेरा कद
वर्तमान युग में
बौने होते राम
मेरे समक्ष
रावण

ढोल बाजे और More

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Words: 2,450
Language: Hindi
ISBN: 9781370327126
About वर्जिन साहित्यपीठ

सम्पादक के पद पर कार्यरत

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