मैं अद्वितीय हूँ (कविता संग्रह)

मत दिखाओ यह आंखें
फोड़ भी देंगे यह आंखें
देश मुझे अति प्रिय मेरा
झुका के देखो यह आंखें
शर्म नहीं आती ओ बेशर्म
क्या बेच खाई हैं यह आंखें
अपना समझ छोड़ा तुम्हें
निर्लज्ज तु, तेरी यह आंखें
देशद्रोह हमें सहन नहीं है
झुकाई हैं तेरी यह आंखें
मत दिखाओ यह आंखें
फोड़ भी देंगे यह आंखें
देश मुझे अति प्रिय मेरा
झुका के देखो यह आंखें
शर्म नहीं आती ओ बेशर्म
क्या बेच खाई हैं यह आंखें
अपना समझ छोड़ा तुम्हें
नि More

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Words: 2,630
Language: Hindi
ISBN: 9780463660638
About वर्जिन साहित्यपीठ

सम्पादक के पद पर कार्यरत

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