छेड़ दो तार (काव्य संग्रह)

छेड़ दो तार

छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे
मन में दीपक प्रभा का दमकने लगे
खिल उठें सारी कलियाँ
पवन झूम ले
गुन गुनायें ये पंक्षी
गगन चूम ले
प्यार ही प्यार हो
हर दिशाओं में अब

छेड़ दो तार

छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे
मन में दीपक प्रभा का दमकने लगे
खिल उठें सारी कलियाँ
पवन झूम ले
गुन गुनायें ये पंक्षी
गगन चूम ले
प्यार ही प्यार हो
हर दिशाओं में अब

छेड़ दो तार

छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे
मन में दीप More

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Words: 4,690
Language: Hindi
ISBN: 9780463445853
About वर्जिन साहित्यपीठ

सम्पादक के पद पर कार्यरत

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