स्कूल का दादा (मनोरंजक व शिक्षाप्रद बालकथाएँ)

इसी पुस्तक से....

“नहीं पिताजी, आज से मेरा जन्मदिन केक से नहीं; बल्कि इन नन्हें पौधों के रोपने से मनेगा।”
“बच्चों! मुझे व इस देश को तुम पर गर्व है। निश्चय ही अपने विद्यालय की भांति ही देश के वातावरण को भी हरा-भरा बनाने में सफल होगे।”
“कभी-कभी प्रार्थना के बाद भारत माता की जय की आवाज सुनकर वह भी अपना हाथ ऊपर कर देता। पर उसकी आवाज सुनायी नहीं पड़ती। वह बोल नहीं पाता था; लेकिन उसकी आंखों में पढ़ने और More

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Words: 5,330
Language: Hindi
ISBN: 9780463078785
About वर्जिन साहित्यपीठ

सम्पादक के पद पर कार्यरत

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