सबरनाखा

शायद तुम्हारे लिए आनंद है

सप्ताह भर से
भूखे पेट हूँ
पेट के गड्ढे में
आग जल रही है
धू-धू कर
हुंह और बर्दास्त नहीं हो रहा है
सर के ऊपर तक
आग की लपटें उठ रही हैं
पेट के गड्ढे को भरने
जलती आग को
बुझाने के लिए
तुमसे कितना प्रार्थना किया
एक मुट्ठी भोजन के लिए
बार-बार गया तुम्हारे पास
पर तुम
बचे हुए भोजन को
अधखाया और जूठन को
मुझे देने में
तुम्हें नागवार लगा
गन्दी नाली में बहा दिया
शायद तुम्हारे लिए आनं More

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सम्पादक के पद पर कार्यरत

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