कल्पना रामानी

Biography

६ जून १९५१ को उज्जैन में जन्म। हाई स्कूल तक औपचारिक शिक्षा। कंप्यूटर से जुड़ने के बाद रचनात्मक सक्रियता। कहानियाँ, लघुकथाओं के अलावा गीत, गजल आदि छंद विधाओं में रुचि.
लेखन की शुरुवात -सितम्बर २०११ से
रचनाएँ अनेक स्तरीय मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं के साथ ही अंतर्जाल पर लगातार प्रकाशित होती रहती हैं।

*प्रकाशित कृतियाँ-
१)नवगीत संग्रह- “हौसलों के पंख”(२०१३-अंजुमन प्रकाशन)
३)गीत-नवगीत- संग्रह-“खेतों ने ख़त लिखा”(२०१६-अयन प्रकाशन)
४)ग़ज़ल संग्रह- संग्रह मैं ‘ग़ज़ल कहती रहूँगी’(२०१६ अयन प्रकाशन)

*पुरस्कार व सम्मान
-पूर्णिमा वर्मन(संपादक वेब पत्रिका-“अभिव्यक्ति-अनुभूति”)द्वारा मेरे प्रथम नवगीत संग्रह पर नवांकुर पुरस्कार से सम्मानित
-कहानी प्रधान पत्रिका कथाबिम्ब में प्रकाशित कहानी 'कसाईखाना' कमलेश्वर स्मृति पुरस्कार से सम्मानित
- कहानी 'अपने-अपने हिस्से की धूप" प्रतिलिपि कहानी प्रतियोगिता में प्रथम व लघुकथा "दासता के दाग" के लिए लघुकथा प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित

*सम्प्रति
वर्तमान में वेब पर प्रकाशित होने वाली पत्रिका- अभिव्यक्ति-
अनुभूति(संपादक/पूर्णिमा वर्मन) के सह-संपादक पद पर कार्यरत।

Books

परिणय के बाद
Price: Free! Words: 33,430. Language: Hindi. Published: April 19, 2019. Categories: Plays » Women Authors
इस ई बुक में मेरी १३ कहानियाँ संग्रहीत हैं ये समाज के आधुनिक रूप का दर्पण कही जा सकती हैं. मेरी हर कहानी अंत में पाठक को सन्देश और संतोष देकर ही समाप्त होती है. इन कहानियों में सामाजिक विसंगतियों को विशेष रूप से उभारा गया है. सभी कहानियाँ अलग-अलग विषय वस्तु पर लिखी गई हैं. मेरी हर कहानी आपको अपने आसपास ही घटती हुई दिखाई देगी. जो आप पढ़ने के बाद ही जान सकेंगे.
पीली साड़ी
Price: Free! Words: 13,470. Language: Hindi. Published: January 31, 2019. Categories: Fiction » Literature » Literary
यह तो आप जानते ही हैं साहित्य समाज का दर्पण होता है. मैंने यही ध्यान में रखकर यह पुस्तक निर्मित की है. विषय अनेक हैं और घटनाएँ आपको अपने आसपास घटती हुई प्रतीत होंगी, जो आपको कुछ सोचने के लिए मजबूर कर देंगी. हम कहाँ थे और कहाँ आ पहुँचे हैं, पुरखों से मिले हुए संस्कार कहाँ खो गए? रिश्ते-नाते अपनापन अब कहाँ है? इन सवालों के जवाब खोजती, समाज को दर्पण दिखाती हुईं ये लघुकथाएँ आपको अवश्य पसंद आएंगी.
बेटियाँ होंगी न जब
Price: Free! Words: 11,500. Language: Hindi. Published: January 30, 2019. Categories: Poetry » Contemporary Poetry
मेरे ग़ज़ल संग्रह के बारे में जानने के लिए नमूने के तौर पर कुछ शेर प्रस्तुत हैं- 'कल्पना' अंजाम सोचो, बेटियाँ होंगी न जब रूप कितना सृष्टि का हो जाएगा विकराल माँ! "भर्त्सना के भाव भर, कितनी भला कटुता लिखें नर पिशाचों के लिए हो काल, वो रचना लिखें". "वतन को जान हम जानें, हमारी जां वतन में हो" "जूझती थी बेड़ियों से, जो कभी लाचार हिंदी उड़ रही पाखी बनी वो सात सागर पार हिंदी"

कल्पना रामानी's tag cloud

apnapan    betiyaa    betiyan    green signal    kalpana    kasaikhana    love    love story    mamta    naseeb    picnic    wriddhashram