कारवां

यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया फलसफां जिन्दगी का, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया|| जिंदगी एक सफर ही तो है; बचपन से जवानी और ढलती उम्र के साथ कितने पड़ाव को पार करते हुये हम अनवरत चलते रहते| ऐसी ही मेरी जिंदगी का भी ये सफर जिसमें बचपन की किलकारियाँ भी है, गाँव की पंगडंडिया, खेत खलिहान चौपाल और उसमे बसी मेरी यादें| वो माँ की दुलार पिताजी की फटकार, मास्टर जी की सीख, अपने शहर की गलियाँ, More

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